हरिद्वार की पहचान बनी 108 फीट ऊंची शिव प्रतिमा, स्थापना से जुड़ी है रोचक कहानी, कैसेट किंग गुलशन कुमार का था सपना

Capture

भजनों और भक्ति संगीत को अलग पहचान दिलाने वाले गुलशन कुमार ने सबसे पहले शिव प्रतिमा स्थापना की योजना बनाई थी, सचिन कुमार की रिपोर्ट

हरिद्वार: हरकी पैड़ी, मनसा देवी, चंडी देवी और दक्षेश्वर महादेव मंदिर समेत कई प्राचीन मठ और मंदिर धर्मनगरी हरिद्वार की आध्यात्मिक पहचान हैं. लेकिन अब हरकी पैड़ी के समीप स्थापित भगवान शिव की 108 फुट ऊंची विशाल प्रतिमा भी हरिद्वार की एक अलग पहचान बन चुकी है. स्थानीय लोगों के अनुसार ये प्रतिमा प्रसिद्ध भजन गायक और टी सीरीज कम्पनी के संस्थापक गुलशन कुमार के सहयोग से स्थापित की गई. गंगा किनारे दूर से दिखाई देने वाली यह भव्य शिव प्रतिमा श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है.

हरिद्वार की 108 फीट ऊंची शिव प्रतिमा से गुलशन कुमार का कनेक्शन: स्थानीय लोगों के अनुसार गुलशन कुमार का धर्मनगरी हरिद्वार से बेहद लगाव था. उन्होंने अपने कई गानों की शूटिंग धर्मनगरी हरिद्वार में की थी. अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने हरिद्वार के कई धार्मिक स्थलों पर अपने गानों की शूटिंग की. मां गंगा और भगवान भोलेनाथ में आस्था रखने वाले गुलशन कुमार ने गंगा तट पर भगवान शिव की विशाल और ऊंची मूर्ति स्थापित करने की इच्छा जताई.

गुलशन कुमार ने देखा था शिव प्रतिमा स्थापित करने का सपना: हालांकि जीवित रहते हुए उनकी यह इच्छा तो पूरी नहीं हुई, लेकिन उनके निधन के बाद उनकी पत्नी, बेटे और परिजनों ने साल 2000 में उनकी उस इच्छा को पूरा किया. आज यह मूर्ति हरिद्वार में अन्य तीर्थ स्थलों के साथ ही अलग ही आकर्षण का केंद्र बन गई है. हरिद्वार आने वाला शायद ही कोई पर्यटक हो, जो इस विशाल प्रतिमा के साथ फोटो, सेल्फी या वीडियो रील बनाना भूलता हो.

हरिद्वार में हर की पैड़ी पर स्थापित है शिव प्रतिमा: भगवान शिव की 108 फुट ऊंची मूर्ति हरकी पैड़ी के नजदीक के सामने गुजरने वाले हरिद्वार देहरादून हाईवे किनारे बने स्वामी विवेकानंद पार्क में स्थापित है. पार्क में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के साथ ही यह मूर्ति भी अलग ही रंग में नजर आती है. मूर्ति के पीछे साधु संतों की एक कुटिया है.

बुजुर्ग संत ने बताई प्रतिमा बनने की पूरी कहानी: उस कुटिया में वर्षों से रह रहे बुजुर्ग संत रमनपुरी जी महाराज ने मूर्ति स्थापना के पीछे की कहानी बताई. उन्होंने बताया कि-

90 के दशक में गुलशन कुमार भगवान शिव को लेकर एक फिल्म की शूटिंग के लिए हरिद्वार आए थे. उसी दौरान उन्होंने गंगा किनारे जागरण का का आयोजन किया और एक विशाल मूर्ति की स्थापना करने की इच्छा जाहिर की. उन्होंने मूर्ति की दशा और दिशा के बारे में भी बताया. साल 2000 में उनके परिजनों के सहयोग से गंगा किनारे यूपी सिंचाई विभाग की भूमि पर मूर्ति स्थापना का कार्य शुरू कराया.
-रमनपुरी जी महाराज, संत, जूना अखाड़ा-

तीन साल में पूरा हुआ था मूर्ति स्थापना कार्यक्रम: संत रमन पुरी महाराज ने बताया कि 2001 के प्रयागराज कुंभ से वापस आने के बाद उन्होंने भूमि पूजन किया और 3 साल में मूर्ति निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ. विधि विधान के साथ मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई. आज यह मूर्ति हरिद्वार की अनूठी पहचान बन गई है. यहां पर भक्त आते हैं और पूजा अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने का आशीर्वाद भी भगवान शिव से मांगते हैं.

तीर्थ पुरोहित ने बताया शिव मूर्ति का महत्व: वहीं तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने बताया कि गुलशन कुमार भारत के सबसे बड़े कैसेट निर्माता थे. उन्होंने अपने भजन और भक्ति गीतों से पूरे विश्व में भारत की अलख को जगाया था. पंडित ने कहा कि-

गुलशन कुमार के सहयोग से ही हरिद्वार में भगवान शिव की सबसे ऊंची प्रतिमा की स्थापना कराई गई थी. धर्मनगरी हरिद्वार से उन्हें बहुत लगाव था. हरिद्वार में मां गंगा के तट पर गंगा स्नान, पूजा पाठ और भजन इत्यादि करके उन्हें बहुत ख्याति प्राप्त हुई. इसी कारण उन्होंने हरिद्वार में भगवान शिव की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने के साथ ही हर की पैड़ी और मां मनसा देवी और अन्य स्थानों पर छोटे-छोटे मंदिरों की स्थापना भी कराई थी.
-उज्ज्वल पंडित, तीर्थ पुरोहित-

हरिद्वार की पहचान बन चुकी है 108 फीट ऊंची शिव प्रतिमा: आज उनके द्वारा स्थापित कराई गई भगवान शिव की मूर्ति हरिद्वार के अन्य तीर्थ स्थलों की तरह ही अलग पहचान बन गई है. भले ही गुलशन कुमार आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा स्थापित की गई ये मूर्ति आकर्षण का केंद्र बन गई है. जो कोई भी श्रद्धालु हरिद्वार आता है, यदि उसने इस मूर्ति के दर्शन नहीं किए तो शायद उसे अपनी धार्मिक यात्रा अधूरी लगती है.

वरिष्ठ पत्रकार ने क्या कहा: वरिष्ठ पत्रकार मनोज खन्ना ने बताया कि-

प्रसिद्ध भजन गायक गुलशन कुमार अपने जीवनकाल में भगवान शिव की विशाल प्रतिमा स्थापित करने की इच्छा रखते थे, लेकिन उनकी हत्या हो जाने के कारण यह सपना अधूरा रह गया था. उनका हरिद्वार के कनखल निवासी शर्मा परिवार से घनिष्ठ संबंध था. बल्लभ शर्मा और श्याम शर्मा ने गुलशन कुमार के निधन के बाद उनके परिजनों को उनकी इस इच्छा के बारे में जानकारी दी थी.
-मनोज खन्ना, वरिष्ठ पत्रकार-

कन्या के हाथों हुआ था भूमि पूजन: इसके बाद गुलशन कुमार की इच्छा को पूरा करने के लिए उनके परिजनों ने वर्ष 2000 में तत्कालीन जिलाधिकारी और यूपी सिंचाई विभाग से अनुमति लेकर प्रतिमा स्थापित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई. शर्मा परिवार के घर की सबसे छोटी कन्या प्राची शर्मा के हाथ से भूमि पूजन कराया और 3 साल में यह मूर्ति बनाकर तैयार हो गई.

फिल्मों में भी दिखाई देती है ये शिव प्रतिमा: धार्मिक पर्यटन के साथ साथ सोशल मीडिया पर भी यह प्रतिमा हरिद्वार की पहचान के रूप में नजर आती है. कई फिल्मों, धार्मिक कार्यक्रमों और गीतों की शूटिंग के लिए इस शिव प्रतिमा के शॉट्स शामिल किए जाते रहे हैं.

हरकी पैड़ी के पास स्थापित भगवान शिव की यह विशालकाय प्रतिमा आज श्रद्धा, आस्था और आधुनिक हरिद्वार की पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गई है. दूरदराज से लोग यहां आते हैं और हाईवे से चलती गाड़ियों में मोबाइल निकाल कर इस मंदिर की फोटो लेते हैं.

समय के साथ बदलता गया शिव प्रतिमा का रंग: साथ यही बता दें कि भगवान शिव की मूर्ति की देखरेख हरिद्वार जिला प्रशासन द्वारा की जाती है. स्थापना के समय मूर्ति का रंग पहले सफेद था. बाद में इसको ताम्र रंग से रंगा गया. 2010 में इसे नीले रंग में रंगा गया.