पशुपालकों की आमदनी के खुलेंगे द्वार, उत्तराखंड बनने जा रहा देश का पहला राज्य

1200-675-26961865-thumbnail-16x9-pic-aspera

उत्तराखंड के पशुपालकों के लिए कुछ ऐसा होने जा रहा है जो एकाएक उनकी आमदनी को बढ़ा देगा.

देहरादून: उत्तराखंड के पशुपालकों के लिए आने वाला समय नई संभावनाओं से भरा हो सकता है. राज्य का पशुपालन विभाग एक ऐसी आधुनिक तकनीक पर काम कर रहा है. जिससे पशुओं की नस्ल में तेजी से सुधार होगा और पशुपालकों की आमदनी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. खास बात यह है कि इस तकनीक को लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनने जा रहा है.

पशुपालन विभाग का दावा है कि अब तक पशुओं की नस्ल सुधार के लिए जिस पारंपरिक कृत्रिम गर्भाधान प्रणाली का उपयोग किया जाता रहा है, उसकी तुलना में नई तकनीक कहीं अधिक प्रभावी साबित होगी. इसके जरिए पशुओं में बेहतर जेनेटिक गुणों का विकास पहली पीढ़ी से ही देखने को मिलेगा, जबकि मौजूदा व्यवस्था में ऐसे परिणाम आने में तीन से चार पीढ़ियां लग जाती हैं. दरअसल राज्य सरकार और पशुपालन विभाग ने पशुधन की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है. इस योजना के तहत अब केवल कृत्रिम गर्भाधान तक सीमित रहने के बजाय आधुनिक भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक यानी एम्ब्रियो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा.

इसमें उच्च गुणवत्ता वाले पशुओं के भ्रूण को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर दूसरे पशुओं में प्रत्यारोपित किया जाएगा. इससे पैदा होने वाले बछड़े और बछियां बेहतर नस्ल के होंगे और उनकी उत्पादकता भी सामान्य पशुओं की तुलना में काफी अधिक होगी.पशुपालन विभाग का कहना है कि इस तकनीक से पशुधन में जेनेटिक सुधार की प्रक्रिया कई गुना तेज हो जाएगी. इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा, पशुओं की गुणवत्ता बेहतर होगी और पशुपालकों को बाजार में अपने पशुओं की अधिक कीमत मिलेगी. विभाग का मानना है कि यह प्रयोग राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाने में मददगार साबित होगा.

इस महत्वाकांक्षी योजना को राज्य सरकार का भी समर्थन मिला है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट इस योजना को मंजूरी दे चुकी है. इसके बाद विभाग ने जमीनी स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं. पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा इसे प्रदेश के पशुपालकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि और अवसर बता रहे हैं.

उत्तराखंड लंबे समय से पशुपालन क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है. अब जो पहल की जा रही है, वह पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान दिला सकती है. इस तकनीक का लाभ चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश के पशुपालकों तक पहुंचाया जाएगा.
-सौरभ बहुगुणा, पशुपालन मंत्री उत्तराखंड-

योजना के तहत सबसे पहले तीन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा. इनमें देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिले शामिल हैं. इन जिलों के चयन की वजह यहां पशुपालन गतिविधियों का अधिक होना और बेहतर आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता मानी जा रही है. पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा.इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाली नई पीढ़ी के पशु मिल सकेंगे. बेहतर नस्ल के बछड़ों की बाजार में कीमत सामान्य पशुओं की तुलना में कई गुना अधिक होती है.

वहीं उच्च गुणवत्ता वाली बछियां आगे चलकर अधिक दूध उत्पादन करने में सक्षम होती हैं. इससे सीधे तौर पर पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी होगी.पशुपालन विभाग ने इस योजना के संभावित आर्थिक लाभों का भी आकलन किया है. विभाग का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इस तकनीक के माध्यम से प्रदेश में लगभग 7000 मीट्रिक टन अतिरिक्त दूध उत्पादन संभव हो सकेगा. इससे पशुपालकों की आय में करीब 30 करोड़ रुपये तक की वृद्धि होने की संभावना है. यही वजह है कि विभाग इस योजना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर मान रहा है. इस पूरी परियोजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके लिए किसी विदेशी तकनीक या बाहरी विशेषज्ञों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी.

उत्तराखंड ने इस तकनीक को अपने स्तर पर विकसित किया है. देहरादून जिले के कालसी स्थित पशुधन उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) में इस तकनीक को लेकर कई प्रयोग किए गए हैं और शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं. इन्हीं सफल परीक्षणों के आधार पर अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी की जा रही है.हालांकि इस तकनीक की वास्तविक लागत काफी अधिक है. विभागीय आकलन के अनुसार एक पशु में विकसित भ्रूण प्रत्यारोपित करने का खर्च लगभग 18,500 रुपये आता है. लेकिन सरकार पशुपालकों पर आर्थिक बोझ कम रखने के लिए भारी सब्सिडी देने की तैयारी में है.

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पशुपालकों से केवल 1,500 से 2,000 रुपये तक का अंशदान लिया जाएगा, जबकि बाकी खर्च सरकार वहन करेगी.यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो उत्तराखंड पशुधन विकास के क्षेत्र में देश के लिए एक मॉडल राज्य बन सकता है. इससे न केवल पशुओं की नस्ल में तेजी से सुधार होगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे.उत्तराखंड का यह अभिनव प्रयोग पशुपालन क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत माना जा रहा है. यदि विभाग की उम्मीदों के अनुरूप परिणाम सामने आते हैं तो आने वाले सालों में प्रदेश के हजारों पशुपालकों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और उत्तराखंड देश के पशुधन विकास मानचित्र पर एक नई पहचान स्थापित कर सकता है.